‘Kashmakash’, an internal conflict by Kamal Hussain

“अजी, सुनिये मार्केट जा रहे हैं तो मेरा कास्मेटिक का सामान लेते आइयेगा” मैंने इस आवाज को सुना ! रोज सुनता हूँ ! अपने हाथ में पकड़ी अम्मा की दवाइयों का पर्चा देखा जो जरुरी था।  मगर पैसे [...]