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अनजान

 

क्या सीखूँ तुझसे ज़िन्दगी, मैं खुद से ही अनजान  हूँ |

 

तेरे लिए जियूँ, तो अपने मन की रानी हूँ ।

खुद के लिए जियूँ, तो मै अभिमानी हूँ ॥

अपनों के लिए जियूँ, तो  दुनिया से अनजान हूँ ,

दुनियाँ के लिए जियूँ, तो अपनो से परेशान  क्यों ?

 

कुछ कमी है मुझमे शायद या मानसिकता से बिमार हूँ?

 

क्या सीखूं  तुझसे ज़िन्दगी,

मैं खुद से ही अनजान हूँ

 

उलझन मेरी बढ़ जाती हैं ।

कई प्रश्नों से घिर जाती हूँ, जब-जब थोड़ी बारीकी से, मैं तुझे जानने आती  हूँ।

 

डर लगता मुझे इन सबसे

मैं हल्की सी हैरान हूँ

 

क्या सीखूं  तुझसे ज़िन्दगी,

मैं खुद से ही अनजान हूँ

 

-Arti Verma

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